संविधान के 77 वर्ष पूरे होने पर संस्कार भारती की विचार एवं काव्य गोष्ठी

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हरिद्वार। संस्कार भारती की हरिद्वार महानगर इकाई द्वारा सेक्टर-2 स्थित सरस्वती विद्या मंदिर के सभागार में ‘एक शाम भारतीय संविधान के नाम’ विषय पर विचार एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नगर विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्रा ने कहा कि संस्कारों और संवैधानिक कर्तव्यों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना हमारा सामूहिक उत्तरदायित्व है।
उन्होंने कहा कि हमें अपनी प्राचीन परंपराओं, संस्कारों और कर्तव्यों के पालन की भावना को सावधानीपूर्वक भावी पीढ़ी तक संप्रेषित करना चाहिए। उन्होंने बताया कि बीते वर्षों में इस दिशा में सकारात्मक प्रयास हुए हैं।

कार्यक्रम में भारतीय संविधान के 77 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर बीस से अधिक वक्ताओं एवं कवियों ने अपने विचार और काव्य प्रस्तुत किए। इस अवसर पर सभी कवियों को ‘संस्कार भारती काव्य श्री सम्मान’ तथा वक्ताओं को ‘संस्कार भारती साहित्य श्री सम्मान’ से सम्मानित किया गया। मुख्य व विशिष्ट अतिथियों को स्मृति चिन्ह और अंगवस्त्र भेंट किए गए।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ भारती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन, माल्यार्पण, वाणी वंदना एवं डॉ. श्वेता शरण के संगीतमय ध्येय गीत से हुआ।
काव्य प्रस्तुतियों में आशा साहनी, अमित कुमार गुप्ता ‘मीत’, अरुण कुमार पाठक, अर्चना झा ‘सरित’, रवीना राज, मीनाक्षी चावला, सुभाष मलिक सहित अन्य कवियों ने संविधान और देशभक्ति से ओतप्रोत रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महेश चन्द्र काला ने की। अतिथियों का स्वागत राकेश मालवीय ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन संतोष साहू द्वारा किया गया।
विचार गोष्ठी में पवन राठौर, डॉ. नीता नय्यर ‘निष्ठा’, डॉ. अशोक गिरि, वीना सिंह, वृंदा वाणी, डॉ. सुगंध पांडे, रेखा सिंघल सहित कई विद्वानों ने संविधान के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार व्यक्त किए।
प्रांतीय मातृ शक्ति संयोजिका ज्योति भट्ट ने इंदौर शिविर के अनुभव साझा किए और कलाकार बहनों के सर्वेक्षण में सहयोग का आह्वान किया। कार्यक्रम में नितिन गौतम, जगदीश लाल पाहवा, डॉ. विशाल गर्ग, सुमन पंत, कंचन प्रभा गौतम, रोहिताश्व कुँवर, डॉ. अजय पाठक, पं. शिवनारायण शर्मा सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी, कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
इस आयोजन के माध्यम से संविधान के मूल्यों, नागरिक कर्तव्यों एवं भारतीय संस्कृति के महत्व पर सार्थक संवाद स्थापित किया गया।

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