हल्द्वानी/बागेश्वर। उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के कांडा सौखोला क्षेत्र की बेटी खुशी नगरकोटी ने अपनी मेहनत और प्रतिभा से परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया है। पूर्व हवलदार भूपाल सिंह नगरकोटी की बेटी खुशी का प्रतिष्ठित आर्म्ड फोर्सेस मेडिकल कॉलेज (AFMC), पुणे में एमबीबीएस के लिए चयन हुआ है। खुशी ने AFMC की वरीयता सूची में प्रथम 20 अभ्यर्थियों में स्थान हासिल किया है। वर्तमान में खुशी अपने परिवार के साथ हल्द्वानी में रह रही हैं, जबकि उनका मूल निवास कांडा सौखोला है।
खुशी का बचपन से ही भारतीय सेना में सेवा करने और डॉक्टर बनने का सपना था। इसी लक्ष्य को लेकर उन्होंने कड़ी मेहनत की और राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में 99.67 परसेंटाइल हासिल किया। इसके साथ ही उन्होंने जेईई परीक्षा में भी प्रतिभा का प्रदर्शन किया और गणित विषय के बिना 93 परसेंटाइल प्राप्त किए।
खुशी का प्रवेश डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी में भी होना था, लेकिन भारतीय सेना में डॉक्टर बनने के अपने लक्ष्य को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने AFMC के लिए साक्षात्कार दिया। हाल ही में घोषित परिणाम में उन्हें उत्कृष्ट वरीयता मिली। अब वह पुणे जाकर AFMC में एमबीबीएस की पढ़ाई करेंगी। पढ़ाई और सैन्य प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्हें भारतीय सेना में डॉक्टर के रूप में कमीशन प्राप्त होगा।
परिवार में तीसरी पीढ़ी करेगी सेना में सेवा
खुशी की उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि वह अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी में सेना में कमीशन अधिकारी बनने जा रही हैं। उनके पिता भूपाल सिंह नगरकोटी ने कुमाऊं स्काउट्स से सैन्य सेवा शुरू की और बाद में स्वेच्छा से 3 पैरा स्पेशल फोर्सेस में सेवा दी। वर्ष 2024 में सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद वर्तमान में वह डीएससी में सेवाएं दे रहे हैं।
खुशी के नाना कैप्टन खड़क सिंह, 5 कुमाऊं ने भी उनके पालन-पोषण और शिक्षा-दीक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। परिवार से मिले सैन्य संस्कार, अनुशासन और देशसेवा की भावना ने खुशी को सेना में डॉक्टर बनने के लिए प्रेरित किया।
खुशी के AFMC में चयन की जानकारी मिलते ही उत्तराखंड पूर्व सैनिक लीग, नैनीताल के अध्यक्ष कर्नल बी.एस. रौतेला (सेवानिवृत्त) ने उनके घर पहुंचकर उन्हें और परिवार को बधाई दी। उन्होंने कहा कि खुशी ने कांडा सौखोला सहित पूरे उत्तराखंड का नाम रोशन किया है। एक सैनिक की बेटी का सेना में डॉक्टर बनकर कमीशन अधिकारी बनना पूर्व सैनिक समाज के लिए गर्व की बात है।
