महाशिवरात्रि पर आज बागेश्वर जिले में बाबा बागनाथ मंदिर हर-हर महादेव और ॐ नमः शिवाय के जयकारे से गुंजायमान रहे। शिवालयों को फूल-मालाओं से सजाया गया है। महा शिवरात्रि के मौके पर श्रद्धालुओं ने पवित्र सरयू नदी में आस्था की डुबकी लगाई। श्रद्वालुओं ने शिवमंदिरों में बेलपत्र और कच्चे दूध से भगवान शिव का अभिषेक किया।
महाशिवरात्रि भगवान शिव का प्रमुख पर्व और हिन्दुओं का एक प्रमुख त्यौहार है। फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को शिवरात्रि पर्व मनाया जाता है। माना जाता है कि सृष्टि का प्रारंभ इसी दिन से हुआ। कुमाउं की काशी बागेश्वर में मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव बैजनाथ धाम से अपनी बारात लेकर बागेश्वर आए और यहीं उनका पार्वत्री से विवाह हुवा। आज महाशिवरात्रि के दिन श्रद्धालुओं ने बागनाथ मंदिर में स्थित प्राचीन कालभैरव मंदिर, बाणेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना की। पंडितों से रुद्री पाठ कराया। पंडितो का कहना है कि महाशिवरात्रि के दिन शिवयोग और सिद्धियोग का संयोग से त्यौहार का महत्व और ज्यादा बढ़ गया है।
भक्तों ने शिव से मनोकामना की पूर्ति के लिए वरदान मांगा। भक्तों की बम-बम भोले की गूंज से माहौल भक्तिमय रहा। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन सृष्टि का आरम्भ अग्निलिंग के उदय से हुआ। यह भी मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव का विवाह देवी पार्वती के साथ हुआ था। इसके साथ ही ये भी मान्यता है कि महाशिव रात्रि के दिन ही भगवान शिव ने कालकूट नामक विष को अपने कंठ में रख लिया था, जो समुद्र मंथन के दौरान बाहर आया था।

