बागेश्वर: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल एवं प्रदेश के अभिभावक तुल्य वरिष्ठ नेता भगत सिंह कोश्यारी को पद्म भूषण से सम्मानित किए जाने की घोषणा समस्त उत्तराखंडवासियों के लिए गर्व और प्रसन्नता का विषय है। यह सम्मान उनके दशकों लंबे सार्वजनिक जीवन, निष्ठावान राष्ट्रसेवा और जनकल्याण के प्रति समर्पण का प्रतीक है।
कोश्यारी का राजनीतिक जीवन सादगी, सिद्धांत और अनुशासन की मिसाल रहा है। एक शिक्षक के रूप में अपने जीवन की शुरुआत करने वाले कोश्यारी जी ने राजनीति को सेवा का माध्यम बनाया। उन्होंने सदैव आमजन की समस्याओं को प्राथमिकता दी और सत्ता को दायित्व के रूप में निभाया। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने राज्य के आधारभूत ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्वतीय क्षेत्रों के समग्र विकास पर विशेष ध्यान दिया।
महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में भी उनका कार्यकाल संतुलन, संवैधानिक मर्यादा और लोकतांत्रिक मूल्यों के पालन के लिए जाना जाता है। कठिन राजनीतिक परिस्थितियों में भी उन्होंने संवाद, संयम और संवैधानिक परंपराओं को सर्वोपरि रखा। उनके निर्णयों में अनुभव, दूरदृष्टि और राष्ट्रहित स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
पर्वतीय क्षेत्रों के विकास, पलायन की समस्या, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने और सांस्कृतिक चेतना के संरक्षण के लिए उनके प्रयास उल्लेखनीय रहे हैं। उन्होंने उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, भाषा और परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का कार्य किया। सामाजिक समरसता और नैतिक मूल्यों की राजनीति उनके व्यक्तित्व की प्रमुख पहचान रही है।
पद्म भूषण जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से अलंकृत होना न केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान है, बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए गौरव का क्षण है। यह सम्मान आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा है कि सादगी, ईमानदारी और राष्ट्रसेवा के मार्ग पर चलकर सर्वोच्च सम्मान प्राप्त किया जा सकता है। समस्त प्रदेशवासियों की ओर से आदरणीय भगत सिंह कोश्यारी जी को इस उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
