बागेश्वर। डिग्री कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव के दौरान बढ़ते राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों और पूर्व छात्र नेताओं ने चिंता जताई है। पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों के बढ़ते हस्तक्षेप से छात्रसंघ चुनाव का मूल स्वरूप प्रभावित हो रहा है। चुनाव के दौरान विवाद, मारपीट और हिंसा की घटनाएं सामने आना शिक्षण संस्थानों के माहौल के लिए चिंताजनक है।
राज्य आंदोलनकारी मदन तड़ागेश्वर ने कहा कि छात्रसंघ चुनाव पहले भी होते रहे हैं, लेकिन वर्तमान में राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ने से कई बार चुनावी माहौल तनावपूर्ण हो जाता है। उन्होंने कहा कि कॉलेज विद्यार्थियों के पढ़ने और भविष्य बनाने का स्थान है। ऐसे में शिक्षण परिसरों में मारपीट और हिंसा की घटनाओं के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उन्होंने लिंग्दोह समिति की सिफारिशों के आधार पर होने वाले छात्रसंघ चुनावों की वर्तमान व्यवस्था पर भी सवाल उठाए।
राज्य आंदोलनकारी एवं पूर्व छात्र नेता हीरावल्लभ भट्ट, रमेश पांडे, कृषक और भुवन कांडपाल ने संयुक्त रूप से कहा कि शिक्षण संस्थानों में राजनीतिक गतिविधियों के बढ़ने से छात्र राजनीति का स्वरूप बदल रहा है। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान विवाद बढ़ने पर कई बार छात्रों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हो जाते हैं, जिसका असर उनके शैक्षणिक जीवन और भविष्य पर पड़ सकता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कॉलेज परिसरों में राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों की सक्रियता बढ़ रही है और इसका सीधा असर छात्र राजनीति पर पड़ रहा है। उनके अनुसार छात्रसंघ चुनाव का उद्देश्य विद्यार्थियों की समस्याओं, शैक्षणिक सुविधाओं और छात्र हितों से जुड़े मुद्दों को उठाना होना चाहिए।
पूर्व छात्र नेताओं ने कहा कि यदि शिक्षण संस्थानों में राजनीतिक हस्तक्षेप और विवाद की स्थिति पर समय रहते प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया तो इसका असर कॉलेजों के शैक्षणिक वातावरण के साथ-साथ भविष्य की राजनीति पर भी पड़ सकता है।
उन्होंने शिक्षण संस्थानों में शांतिपूर्ण और शैक्षणिक माहौल बनाए रखने तथा छात्रसंघ चुनावों को राजनीतिक दलों के प्रभाव से दूर रखने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की।
