नैनीताल। देश में डिजिटल क्रांति तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल जागरूकता और तकनीकी शिक्षा आज भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। खासकर ग्रामीण महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों (SHGs), आशा कार्यकर्ताओं और युवाओं तक डिजिटल ज्ञान पहुंचाना समय की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक है। इसी दिशा में उत्तराखंड के नैनीताल निवासी मनीष आर्य एक नई पहल के साथ लोगों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने का कार्य कर रहे हैं।
मनीष आर्य द्वारा लिखी गई पुस्तक “देवभूमि डिजिटल दीदी” और उनकी एडटेक पहल “ज्ञान गुल्लक एजुकेशन स्किल बेस्ड असेसमेंट” ग्रामीण भारत में डिजिटल शिक्षा, कौशल विकास और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है। उनका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को डिजिटल रूप से सक्षम बनाना, युवाओं को कौशल आधारित शिक्षा देना, डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन व्यवसाय को बढ़ावा देना तथा गांवों को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ना है।
मानव संसाधन प्रबंधन (HRM) और वित्तीय प्रबंधन में विशेषज्ञता रखने वाले मनीष आर्य शिक्षा, तकनीक और सामाजिक विकास के क्षेत्र में लंबे समय से कार्य कर रहे हैं। वे ISRO में स्पेस ट्यूटर, सरकारी आईटीआई में एम्प्लॉयबिलिटी स्किल्स इंस्ट्रक्टर, जिला उद्योग केंद्र में उद्यमिता प्रशिक्षक सहित कई संस्थानों से जुड़े रहे हैं। उन्हें साइबर सुरक्षा, डिजिटल मार्केटिंग और जेनरेटिव एआई से संबंधित विभिन्न प्रमाणपत्र भी प्राप्त हैं।
“देवभूमि डिजिटल दीदी” पुस्तक ग्रामीण महिलाओं और शुरुआती डिजिटल उपयोगकर्ताओं के लिए एक सरल मार्गदर्शिका के रूप में तैयार की गई है। इसमें डिजिटल बैंकिंग, सुरक्षित ऑनलाइन भुगतान, साइबर सुरक्षा, सोशल मीडिया जागरूकता, डिजिटल मार्केटिंग, ऑनलाइन शॉपिंग और सरकारी ई-मार्केटप्लेस जैसे विषयों को आसान भाषा में समझाया गया है। पुस्तक को शिक्षा मंत्रालय से ISBN मान्यता प्राप्त है और यह विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है।
वहीं “ज्ञान गुल्लक” एक स्किल आधारित लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (LMS) है, जो लोगों के वास्तविक कौशल का मूल्यांकन और प्रमाणन करता है। यह प्लेटफॉर्म ग्रामीण महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों, आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं, गृहिणियों तथा युवाओं को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। इसमें प्रतिभागी पहले डिजिटल शिक्षा प्राप्त करते हैं, फिर ऑनलाइन परीक्षा देते हैं और सफल होने पर डिजिटल प्रमाणपत्र प्राप्त करते हैं।
इस पहल की एक खास विशेषता इसका “एंटी-स्क्रॉलिंग मॉडल” है, जिसका उद्देश्य युवाओं के सोशल मीडिया पर बिताए जाने वाले समय को सीखने और कौशल विकास में बदलना है। 100 प्रश्नों और 50 मिनट के ऑनलाइन मूल्यांकन के माध्यम से प्रतिभागियों की तार्किक क्षमता, समय प्रबंधन और निर्णय लेने की योग्यता को भी परखा जाता है।
हाल ही में उत्तराखंड सरकार की राज्य महिला उद्यमिता अध्यक्ष रेनू अधिकारी और जिला उद्योग केंद्र नैनीताल की महाप्रबंधक पल्लवी गुप्ता की उपस्थिति में “देवभूमि डिजिटल दीदी” पुस्तक और ज्ञान गुल्लक डिजिटल ऐप का शुभारंभ किया गया। मनीष आर्य का लक्ष्य उत्तराखंड से शुरू हुई इस पहल को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाकर ग्रामीण भारत में डिजिटल आत्मनिर्भरता और कौशल आधारित शिक्षा को नई दिशा देना है।
