देहरादून/हरिद्वार। भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर चलते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद घोटाले में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। सीएम धामी के निर्देश पर शासन ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कदम उठाए हैं, जिससे पूरे महकमे में हड़कंप मच गया है।
📋 किस अधिकारी पर क्या गिरी गाज?
घोटाले की गहन जांच और ऑडिट के बाद मुख्यमंत्री ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ निम्नलिखित दंडात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं:
प्रकरण में तत्कालीन नगर आयुक्त हरिद्वार नगर निगम वरुण चौधरी को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर की संस्तुति की गई है। वहीं, तत्कालीन जिलाधिकारी हरिद्वार कर्मेंद्र सिंह को अपने पदीय दायित्वों एवं कर्तव्यों के समुचित निर्वहन में गंभीर लापरवाही का दोषी मानते हुए उनके विरुद्ध दीर्घ शास्ति (मेजर पनिशमेंट) अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है। दोनों अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई के लिए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को संस्तुति भेजी जा रही है।
🔍 शुरुआती निलंबन से बर्खास्तगी तक का सफर
तत्काल एक्शन: हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद मामला सामने आते ही सीएम धामी ने सख्त रुख अपनाया था।
शुरुआती कार्रवाई: प्राथमिक जांच में वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के संकेत मिलने पर तत्कालीन DM कर्मेंद्र सिंह और पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी को पहले ही सस्पेंड (निलंबित) कर दिया गया था।
गहन पड़ताल: इसके बाद विशेष जांच टीम और ऑडिट के माध्यम से पूरे घोटाले की परतें खोली गईं, जिसके आधार पर आज यह अंतिम फैसला लिया गया।
“भ्रष्टाचार से कोई समझौता नहीं” — मुख्यमंत्री धामी
कड़ी कार्रवाई के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा:
”भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। शासन-प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित सर्वोपरि है। जनता की गाढ़ी कमाई और पद का दुरुपयोग करने वाले अधिकारियों के खिलाफ ऐसी ही कठोरतम कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।”
ब्यूरोक्रेसी को बड़ा संदेश
धामी सरकार की इस कार्रवाई को उत्तराखंड के प्रशासनिक इतिहास में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और नज़ीर पेश करने वाली कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है। सरकार ने यह साफ कर दिया है कि रसूख चाहे कितना भी बड़ा हो, जनधन के दुरुपयोग पर कानून का डंडा बराबर चलेगा।
