बच्चों की पढ़ाई में दिखेगी स्थानीय संस्कृति की झलक, शिक्षकों को किया जा रहा प्रेरित

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बागेश्वर। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान बागेश्वर में इंटीग्रेटेड लर्निग के तहत पांच दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। कार्यशाला का विषय चाइल्ड सेंटर्ड टीचिंग-लर्निंग मैटेरियल निर्माण एवं आर्ट, क्राफ्ट तथा टॉय-बेस्ड शिक्षण पद्धति का प्रयोग रखा गया है। इसमें जनपद के विभिन्न विकासखंडों से आए प्रारंभिक एवं माध्यमिक स्तर के करीब 40 शिक्षक प्रतिभाग कर रहे हैं।

कार्यशाला में शिक्षकों को आर्ट, क्राफ्ट, खिलौना आधारित शिक्षण तथा बाल-केंद्रित टीचिंग-लर्निंग मैटेरियल निर्माण का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। स्थानीय संसाधनों के माध्यम से तैयार किए जा रहे रचनात्मक टीएलएम को विद्यालयों में विषयवस्तु के साथ जोड़कर बच्चों के सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और आनंददायी बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

कार्यअनुभव विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. हरीश चंद्र जोशी ने बताया कि कार्यशाला में शिक्षक उत्साहपूर्वक विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों में प्रतिभाग कर रहे हैं। आर्ट, क्राफ्ट और खिलौना आधारित शिक्षण के माध्यम से तैयार सामग्री को कक्षा-कक्ष में प्रभावी ढंग से प्रयोग करने के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।

मास्टर ट्रेनर डॉ. हरीश दफौटी ने बताया कि कार्यशाला में शिक्षकों को गतिविधि आधारित एवं बाल-केंद्रित शिक्षण के व्यावहारिक पहलुओं से रूबरू कराया जा रहा है। पपेट, पेपर क्राफ्ट, कोलाज, पेपर मैशे तथा खिलौना आधारित गतिविधियों के जरिए किस प्रकार कठिन विषयवस्तु को बच्चों के लिए सरल और रोचक बनाया जा सकता है, इसका प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि तैयार किए जा रहे टीएलएम का विद्यालयों में नियमित एवं प्रभावी उपयोग होने से विद्यार्थियों की सीखने में रुचि और सहभागिता बढ़ेगी।

कार्यक्रम समन्वयक डॉ. रुचि पाठक ने बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप आर्ट इंटीग्रेटेड लर्निंग को बढ़ावा देना है। इसके माध्यम से शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक रचनात्मक, रोचक और बाल-केंद्रित बनाने के साथ शिक्षकों को स्थानीय संसाधनों से उपयोगी एवं आकर्षक टीएलएम तैयार करने के लिए दक्ष बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कार्यशाला में पपेट निर्माण, पेपर क्राफ्ट, कोलाज, पेपर मैशे और खिलौना आधारित गतिविधियों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। शिक्षक इन गतिविधियों को विभिन्न विषयों की पाठ्यवस्तु से जोड़कर बच्चों को सीखने के अधिक अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

कार्यशाला के माध्यम से शिक्षकों को स्थानीय कला, संस्कृति और उपलब्ध संसाधनों को शिक्षण प्रक्रिया का हिस्सा बनाने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। डाइट की यह पहल विद्यालयों में गतिविधि आधारित शिक्षण को बढ़ावा देने के साथ बच्चों में रचनात्मकता, जिज्ञासा और सीखने के प्रति रुचि विकसित करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

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