सड़क के अभाव में डोली से अस्पताल और श्मशान तक पहुंच रहे ग्रामीण, चंद्रा देवी का सड़क का सपना रह गया अधूरा

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बागेश्वर। कर्मी ग्राम पंचायत के सापुली तोक निवासी चंद्रा देवी का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। सड़क सुविधा से वंचित सापुली गांव में अंतिम संस्कार के लिए भी ग्रामीणों को करीब दो किलोमीटर पैदल रास्ता तय करना पड़ा। सड़क से श्मशान घाट की दूरी भी लगभग एक किलोमीटर है। ग्रामीणों ने डोली के सहारे चंद्रा देवी के पार्थिव शरीर को श्मशान घाट पहुंचाया।

चंद्रा देवी के भतीजे नरेंद्र दानू ने बताया कि वह आजीवन अविवाहित रहीं और अपने भाइयों के साथ रहती थीं। बीमारी के दौरान उन्हें अस्पताल ले जाने के लिए भी डोली का सहारा लेना पड़ता था। चंद्रा देवी गांव तक सड़क पहुंचने का सपना देखती थीं, लेकिन उनका यह सपना अधूरा ही रह गया।

ग्रामीणों के अनुसार सापुली में सड़क के साथ ही पैदल रास्तों की भी स्थिति खराब है। कुछ समय पहले महिलाओं और युवाओं ने श्रमदान कर रास्तों की मरम्मत की और झाड़ियां साफ कीं। गांव भूस्खलन की चपेट में भी आ चुका है, जिससे कई घरों में दरारें आ गई हैं।

सड़क सुविधा नहीं होने से गांव से पलायन भी बढ़ा है और जूनियर हाईस्कूल बंद हो चुका है। नरेंद्र सिंह ने बताया कि वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री की घोषणा के तहत गांव को सड़क से जोड़ने की बात कही गई थी, लेकिन वर्षों बाद भी सड़क निर्माण की मांग पूरी नहीं हुई। ग्रामीणों ने जल्द सड़क निर्माण की मांग की है।

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