बागेश्वर। जिला कार्यालय परिसर में पट्टाधारक पक्ष का अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन दूसरे दिन भी जारी रहा। नवीन कुमार की दो स्वीकृत खदानों के निरीक्षण, कथित अवैध खनन और 51 लाख रुपये की पेनल्टी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। आंदोलनकारियों ने खान अधिकारी के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाते हुए निरीक्षण और कार्रवाई से संबंधित वैधानिक दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की है। प्रदर्शनकारी रात में भी धरनास्थल पर डटे रहे।
अधिवक्ता बसंत कुमार के अनुसार, खान अधिकारी ने मीडिया में उनके पक्ष पर अवैध खनन करने और 51 लाख रुपये की पेनल्टी से बचने के लिए धरना देने का आरोप लगाया है। उन्होंने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि पहले यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि कथित अवैध खनन स्वीकृत खदानों की सीमा के भीतर हुआ या बाहर। उन्होंने आरोपों के समर्थन में संबंधित अभिलेख और कानूनी आधार प्रस्तुत करने की मांग की।
चार प्रमुख सवालों के जवाब मांग रहे आंदोलनकारी
आंदोलनकारियों ने खान अधिकारी की शक्तियों और निरीक्षण प्रक्रिया को लेकर चार प्रमुख सवाल उठाए हैं। पहला, क्या खान अधिकारी को खान अधिनियम, 1952 की धारा 5(1) के तहत इंस्पेक्टर ऑफ माइंस नियुक्त किया गया है, यदि हां, तो नियुक्ति अधिसूचना की प्रति उपलब्ध कराई जाए। दूसरा, नियुक्ति नहीं होने की स्थिति में किन नियमों, शासनादेशों या न्यायालय के आदेश के तहत संबंधित शक्तियों का प्रयोग किया जा रहा है।
तीसरा, नवीन कुमार की दोनों खदानों के निरीक्षण का वैधानिक आधार क्या है, चौथा, खदानों में प्रवेश, निरीक्षण और कार्रवाई करने का अधिकार किस कानून के तहत प्राप्त है। अधिवक्ता ने कहा कि यदि निरीक्षण और पेनल्टी लगाने का अधिकार है, तो उससे संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
ई-रवन्ना रोकने पर भी उठाए सवाल
पट्टाधारक पक्ष ने आरोप लगाया कि नवंबर-दिसंबर 2025 में बिना नोटिस दिए उनके ई-रवन्ना रोक दिए गए थे। उन्होंने संबंधित नोटिस और आदेश की प्रति उपलब्ध कराने की मांग की। उनका कहना है कि ई-रवन्ना रोकने की कार्रवाई का आधार स्पष्ट होना चाहिए और इसे संबंधित नियमों के अनुरूप किया जाना चाहिए।
धरना प्रदर्शन में नवीन कुमार, रितु, दया प्रकाश, अनिल कुमार, भवानी शंकर, कुंदन लाल, प्यारे लाल, मदन मोहन, मनोज कुमार, विजया चंद्र और अशोक कुमार सहित अन्य लोग मौजूद रहे।


