बागेश्वर: जनपद बागेश्वर अंतर्गत बागेश्वर वन प्रभाग द्वारा वनाग्नि की घटनाओं की रोकथाम एवं नियंत्रण को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान शुष्क मौसम को देखते हुए वन विभाग ने चीड़ पिरुल (सूखी पत्तियों) के एकत्रीकरण अभियान में तेजी ला दी है। विभाग ने इस वर्ष 200 टन पिरुल एकत्र करने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसके तहत वनाग्नि संवेदनशील क्षेत्रों से पिरुल संग्रहित किया जा रहा है।
वन विभाग के अनुसार, विभिन्न महिला समूहों, स्वयं सहायता समूहों एवं हंस फाउंडेशन के सहयोग से एकत्रित पिरुल को सोमेश्वर स्थित पिरुल ब्रिकेट्स फैक्ट्री हिमालयन ग्रीन पयाल भेजा जा रहा है। विभाग का मानना है कि इससे वनाग्नि की घटनाओं को कम करने के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं की आजीविका को भी बढ़ावा मिल रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि वनाग्नि के मुख्यतः तीन कारक—हवा, तापमान और ज्वलनशील पदार्थ होते हैं। बागेश्वर जनपद में चीड़ पिरुल की अधिकता के कारण वनाग्नि की घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में ग्रामीण महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों एवं महिला मंगल दलों की मदद से पिरुल एकत्रीकरण कर वन क्षेत्रों को सुरक्षित रखने का प्रयास किया जा रहा है।
वन विभाग का कहना है कि पिरुल संग्रहण अभियान से न केवल जंगलों में आग की घटनाओं में कमी आएगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। साथ ही यह पहल स्थानीय ग्रामीण महिलाओं के लिए आय का एक बेहतर माध्यम भी बन रही है।
वनाग्नि रोकथाम के लिए विभाग द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित गश्त, जनजागरूकता अभियान, त्वरित प्रतिक्रिया दलों की तैनाती और आधुनिक उपकरणों के माध्यम से निगरानी की जा रही है। विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वन सुरक्षा को अपना नैतिक दायित्व समझते हुए वनाग्नि रोकथाम में सक्रिय सहयोग करें।
