10 साल बाद फिर होगा नंदा देवी विश्व धरोहर क्षेत्र का आकलन, ग्लेशियरों से लेकर वन्यजीवों तक पर रहेगी नजर

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चमोली। यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क में वर्ष 2026 का विशेष बायोडायवर्सिटी मॉनिटरिंग एक्सपीडिशन शुरू हो गया है। इस अभियान का उद्देश्य पार्क क्षेत्र की जैव विविधता, हिमनदों, पारिस्थितिक तंत्र और पर्यावरणीय बदलावों का स्थलीय आकलन करना है। यह अध्ययन प्रत्येक दस वर्ष में उत्तराखंड वन विभाग और भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के सहयोग से कराया जाता है।

शनिवार 7 जून को प्रातः ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) से उत्तराखंड के वन एवं पर्यावरण मंत्री श्री सुबोध उनियाल ने अभियान दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के सचिव, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक तथा उत्तराखंड वन विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क, ज्योतिर्मठ के उप वन संरक्षक अभिमन्यु सिंह के निर्देशन में संचालित इस अभियान में उत्तराखंड वन विभाग, भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून, जी.बी. पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान तथा हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ शामिल हैं। भूविज्ञान और हिमालयी हिमनदों के अध्ययन में अनुभवी शोधकर्ता डॉ. सुनील सिंह शाह और कार्तिकेय बिष्ट भी दल का हिस्सा हैं।

वैज्ञानिकों की यह टीम प्रतिबंधित ऋषिगंगा जलग्रहण क्षेत्र में जाकर वर्ष 2003, 2015 और 2026 के आंकड़ों की तुलना करेगी। अध्ययन के दौरान हिमाच्छादित क्षेत्रों में हुए बदलाव, ग्लेशियरों की भू-आकृतियों में परिवर्तन, नदी घाटियों की स्थिति, भू-कटाव और संभावित आपदा संवेदनशील क्षेत्रों का आकलन किया जाएगा।

इसके अलावा विशेषज्ञ यहां की वनस्पतियों, वन्यजीवों और संपूर्ण पारिस्थितिक तंत्र की वर्तमान स्थिति का भी अध्ययन करेंगे। अभियान से प्राप्त आंकड़े नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के संरक्षण और प्रबंधन में मददगार साबित होंगे। साथ ही हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते वैश्विक तापमान और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझने में भी महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराएंगे।

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