आदि कैलाश परिक्रमा रन 2.0 की तैयारियां तेज़, अधिकारियों को दिए आवश्यक निर्देश

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1,300 के करीब धावक लेंगे प्रतिभाग, पिछले वर्ष की तुलना में दोगुनी होगी भागीदारी

पिथौरागढ़। आदि कैलाश परिक्रमा रन 2.0(24 अक्टूबर 2026 से 26 अक्टूबर 2026) के सफल आयोजन को लेकर जिलाधिकारी आशीष भटगांई के निर्देशों के क्रम में जिला प्रशासन द्वारा तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इसी क्रम में मुख्य विकास अधिकारी डॉ. दीपक सैनी, उपनिदेशक पर्यटन पिथौरागढ़ अतुल भंडारी एवं उपजिलाधिकारी धारचूला आशीष जोशी ने आदि कैलाश क्षेत्र के ज्योलिंगकोंग में लगभग 14,500 फीट की ऊंचाई पर पहुंचकर आयोजन से संबंधित व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने संबंधित विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए सभी तैयारियां समयबद्ध ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए।

मुख्य विकास अधिकारी डॉ. दीपक सैनी ने छियालेख से लेकर बूदी, गर्ब्यांग, नपलचु, गुंजी, नाबी, रोकांग एवं कुटी सहित विभिन्न गांवों का भ्रमण कर आदि कैलाश परिक्रमा रन 2.0 की तैयारियों का निरीक्षण किया। उन्होंने आयोजन के दौरान धावकों की सुविधा, सुरक्षा एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को सभी व्यवस्थाएं बेहतर ढंग से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी ने स्थानीय ग्रामीणों से संवाद कर आयोजन को सफल बनाने में सहयोग की अपील की। उन्होंने स्थानीय ग्राम प्रधानों एवं जनप्रतिनिधियों से भी आयोजन में सक्रिय सहभागिता निभाने तथा प्रशासन को आवश्यक सहयोग प्रदान करने का आग्रह किया।

आदि कैलाश परिक्रमा रन 2.0 में इस वर्ष लगभग 1,300 धावकों के प्रतिभाग करने की संभावना है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब दोगुनी है। धावकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा आयोजन की तैयारियों को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। आयोजन को सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं सफल बनाने के लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित करते हुए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।

निरीक्षण के दौरान सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) एवं पर्यटन विभाग के अधिकारियों के साथ स्थानीय ग्राम प्रधान एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।

जिला प्रशासन का उद्देश्य आदि कैलाश परिक्रमा रन 2.0 को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के साथ-साथ क्षेत्र में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देना तथा स्थानीय लोगों की सहभागिता से सीमांत क्षेत्र की पर्यटन संभावनाओं को नई पहचान दिलाना है।

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