48 घंटे में लिखित निर्णय नहीं होने पर धरने की चेतावनी, खनिज परिवहन की अनुमति और रोजगार बहाली की उठाई मांग

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बागेश्वर। सोपस्टोन खदानों पर लगी रोक और पूर्व में उत्खनित खनिज के परिवहन की अनुमति नहीं मिलने से नाराज ग्रामीणों ने कलक्ट्रेट में प्रदर्शन कर प्रशासन के खिलाफ आक्रोश जताया। ग्रामीणों ने खनन संबंधी प्रतिबंधात्मक आदेश की समीक्षा कर खदानें खोलने, खनिज परिवहन की अनुमति देने और स्थानीय लोगों की आजीविका बहाल करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 48 घंटे के भीतर उनकी मांगों पर प्रभावी और लिखित निर्णय नहीं लिया गया तो जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर शांतिपूर्ण धरना शुरू किया जाएगा।

ग्राम भेरूचौबट्टा के खनन पट्टाधारक नवीन कुमार के नेतृत्व में ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को संबोधित प्रत्यावेदन सौंपा। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से खनन गतिविधियां बाधित होने के कारण श्रमिकों के साथ ही खनिज की छंटाई, भराई और परिवहन से जुड़े लोगों की आजीविका पर प्रतिकूल असर पड़ा है। खदानों से जुड़े कामकाज ठप होने के कारण कई परिवारों के सामने रोजगार और आय का संकट खड़ा हो गया है।

प्रत्यावेदन में दावा किया गया है कि स्वीकृत खदानों से पूर्व में निकाला गया करीब दो हजार मीट्रिक टन सोपस्टोन लंबे समय से खुले में पड़ा है। इसमें चार जून 2026 के सुपुर्दगीनामे में दर्ज 1,923.78 मीट्रिक टन खनिज भी शामिल है। पट्टाधारक का आरोप है कि खनिज के परिवहन की अनुमति नहीं मिलने और ई-रवन्ना पोर्टल की सुविधा उपलब्ध नहीं होने से उसका निस्तारण नहीं हो पा रहा है।

ग्रामीणों ने आशंका जताई कि लंबे समय तक खुले में पड़े रहने से वर्षा और नमी के कारण खनिज की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। साथ ही आसपास की भूमि को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है। उन्होंने प्रशासन से मामले की समीक्षा कर खनिज परिवहन की अनुमति देने और लंबित समस्याओं का जल्द समाधान करने की मांग की।

48 घंटे का अल्टीमेटम, आंदोलन की चेतावनी

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि प्रत्यावेदन मिलने के 48 घंटे के भीतर प्रभावी और लिखित निर्णय नहीं लिया गया तो वे अपने परिवारों, श्रमिकों और अन्य प्रभावित ग्रामीणों के साथ जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर शांतिपूर्ण धरना देंगे। इसके बाद भी समस्या का समाधान नहीं होने पर नियमानुसार अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी गई है।

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने कहा कि खनन गतिविधियों पर रोक का असर केवल पट्टाधारकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे खनन कार्यों पर निर्भर श्रमिकों और स्थानीय कारोबार से जुड़े लोगों की आजीविका भी प्रभावित हो रही है। उन्होंने प्रशासन से जनहित और रोजगार के मुद्दे को ध्यान में रखते हुए जल्द निर्णय लेने की मांग की।

इस दौरान दया प्रकाश, ऋतु कुमारी, बसंत कुमार, कुंदन लाल, मदन मोहन, राजेंद्र प्रसाद, ललित मोहन, प्रेम कुमार, विजय कुमार सहित अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।

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