बागेश्वर: जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET), बागेश्वर में जिला संदर्भ समूह विज्ञान के शिक्षकों के लिए आयोजित चार दिवसीय अनुभव आधारित विज्ञान कार्यशाला का समापन हो गया। कार्यशाला में जिले के विभिन्न विद्यालयों से आए 40 विज्ञान शिक्षकों ने प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण के दौरान विज्ञान विषय को आसान, रोचक और प्रयोगात्मक तरीके से पढ़ाने पर जोर दिया गया।
समापन कार्यक्रम में DIET के प्राचार्य डॉ. के.एस. रावत ने कहा कि विज्ञान को केवल किताबों के माध्यम से पढ़ाना पर्याप्त नहीं है। बच्चों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने के लिए उन्हें प्रयोग करने, सवाल पूछने, चीजों का निरीक्षण करने और खुद निष्कर्ष निकालने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि कार्यशाला में सीखी गई गतिविधियों और प्रयोगों को विद्यालयों में बच्चों के साथ जरूर कराया जाए।
उन्होंने कहा कि शिक्षक की भूमिका केवल बच्चों को जानकारी देने तक सीमित नहीं है। शिक्षक को बच्चों में जिज्ञासा और नई चीजें जानने की इच्छा पैदा करने का काम भी करना चाहिए। उन्होंने कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए कार्यक्रम समन्वयक, संदर्भदाताओं और संस्थान के सभी सदस्यों को बधाई दी।
कार्यक्रम समन्वयक डॉ. भुवन चंद्र ने बताया कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को करके सीखने और अनुभव से समझने की प्रक्रिया से जोड़ना था। चार दिनों के दौरान शिक्षकों ने अलग-अलग वैज्ञानिक अवधारणाओं को प्रयोग, गतिविधि, चर्चा, अवलोकन और समस्या समाधान के माध्यम से समझा। कम लागत और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्री से विज्ञान की अवधारणाओं को समझाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया।
कार्यशाला में प्रथम फाउंडेशन की ओर से विनोद उप्रेती, कमलेश जोशी, आशीष, गौरव और हरीश ने संदर्भदाता के रूप में सहयोग किया। उन्होंने शिक्षकों को कई गतिविधियां और प्रयोग कराए। शिक्षकों ने खुद गतिविधियों को करके उनके पीछे छिपे वैज्ञानिक कारणों को समझा और यह भी सीखा कि इन्हें अलग-अलग कक्षाओं के विद्यार्थियों को किस तरह कराया जा सकता है।
कार्यशाला के संचालन में डॉ. दीपा जोशी, डॉ. के.पी. चंदोला, डॉ. राजीव जोशी, डॉ. सी.एम. जोशी, डॉ. उर्मिला बिष्ट कन्याल, डॉ. बी.डी. पांडे, पूजा लोहुमी, डॉ. संदीप कुमार जोशी, डॉ. दयासागर और डॉ. रुचि पाठक समेत संस्थान के अन्य सदस्यों ने सहयोग दिया।
समापन अवसर पर शिक्षकों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि प्रयोग और गतिविधियों को खुद करके सीखने से विज्ञान की अवधारणाओं को समझना आसान हुआ। उन्होंने कार्यशाला में सीखी गतिविधियों को अपने विद्यालयों में लागू करने की बात कही।
कार्यशाला से यह संदेश सामने आया कि विज्ञान केवल किताबों में पढ़ने का विषय नहीं, बल्कि आसपास की चीजों को समझने, सवाल पूछने, प्रयोग करने और प्रमाण के आधार पर निष्कर्ष निकालने की प्रक्रिया है। जिला संदर्भ समूह के शिक्षक इस सोच को जिले के अन्य विद्यालयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
चार दिन में सीखे प्रयोग और नई शिक्षण विधियां
चार दिवसीय प्रशिक्षण में शिक्षकों को विज्ञान पढ़ाने के नए और आसान तरीके बताए गए। स्थानीय संसाधनों और दैनिक जीवन की घटनाओं को विज्ञान शिक्षण से जोड़ने पर जोर दिया गया। शिक्षकों से अपेक्षा की गई कि वे प्रशिक्षण में सीखी गतिविधियों को कक्षा में लागू कर बच्चों में वैज्ञानिक जिज्ञासा, तार्किक सोच, रचनात्मकता और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करेंगे।
