बागेश्वर में समाज सुधारक एवं बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी मुंशी हरि प्रसाद टम्टा की जयंती पर बागेश्वर में गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने मुंशी हरि प्रसाद टम्टा के सामाजिक सरोकारों, वंचित वर्गों के उत्थान और समाज में व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ उनके संघर्ष को याद करते हुए उनके विचारों को आज भी प्रासंगिक बताया। कार्यक्रम में पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
वही पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा ने कहा कि मुंशी हरि प्रसाद टम्टा का पूरा जीवन समाज सुधार के लिए समर्पित रहा। उन्होंने अपने समय में समाज में व्याप्त बुराइयों और कुरीतियों को दूर करने के लिए लगातार संघर्ष किया। सामाजिक असमानता के खिलाफ आवाज उठाते हुए उन्होंने शिक्षा, जागरूकता और सामाजिक सम्मान को आगे बढ़ाने का काम किया। उन्होंने कहा कि मुंशी हरि प्रसाद टम्टा केवल एक समाज सुधारक ही नहीं, बल्कि ऐसे विचारक थे जिन्होंने समाज के कमजोर और पिछड़े वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए। उनके विचार आज भी समाज को नई दिशा देने का काम करते हैं। युवा पीढ़ी को उनके जीवन और संघर्ष से प्रेरणा लेकर सामाजिक एकता और समानता के लिए कार्य करना चाहिए।
वही बसंत कुमार ने कहा कि मुंशी हरि प्रसाद टम्टा ने अपने जीवन में समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाकर लोगों में जागरूकता पैदा करने का काम किया। उनके विचार आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को मुंशी हरि प्रसाद टम्टा के जीवन और संघर्ष से सीख लेकर समाज में समानता, शिक्षा और सामाजिक समरसता को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
वही कार्यक्रम के आयोजक संजय कुमार टम्टा ने कहा कि मुंशी हरि प्रसाद टम्टा का जीवन संघर्ष, सामाजिक चेतना और समाज सेवा की प्रेरणादायक मिसाल है। उन्होंने कहा कि उनकी जयंती मनाने का उद्देश्य केवल उन्हें याद करना नहीं, बल्कि उनके विचारों और सामाजिक सरोकारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी है। आज समाज में कई चुनौतियां मौजूद हैं, ऐसे में मुंशी जी के विचारों को आत्मसात कर सामाजिक एकजुटता और समानता की दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता है।
इतिहास में समाज सुधारकों का योगदान केवल उनके समय तक सीमित नहीं रहता। उनके विचार आने वाली पीढ़ियों को भी दिशा देते हैं। मुंशी हरि प्रसाद टम्टा ने जिस सामाजिक समरसता, शिक्षा और समानता की बात की, वह वर्तमान समय में भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
