संस्कृत को AI और आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर हुआ राष्ट्रीय ई-संगोष्ठी का आयोजन

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हरिद्वार: उत्तराखंड संस्कृत अकादमी एवं शासकीय महाविद्यालय दुगनाकुरी के संयुक्त तत्वावधान में संस्कृत मास महोत्सव के तहत संस्कृते सङ्गणकीय-भाषाविज्ञानस्य आवश्यकता महत्वं च विषय पर राष्ट्रीय ई-संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में देश के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े संस्कृत विद्वानों और विशेषज्ञों ने संस्कृत भाषा को आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण (NLP) से जोड़ने की आवश्यकता पर विचार रखे।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि डिजिटल युग में संस्कृत के संरक्षण, अध्ययन और व्यापक उपयोग के लिए कंप्यूटर आधारित भाषावैज्ञानिक तकनीकों का विकास महत्वपूर्ण है। संस्कृत ग्रंथों को डिजिटल स्वरूप देने के साथ-साथ उनमें उपलब्ध ज्ञान को आधुनिक खोज प्रणालियों के माध्यम से आसानी से उपलब्ध कराने की दिशा में भी कार्य किए जाने की आवश्यकता बताई गई।

डॉ. सुभास चन्द्र ने स्मार्ट ई-बुक परियोजना तथा संस्कृत भाषा में अवधारणात्मक खोज प्रणालियों (Conceptual Searching Tools) के विकास की प्रगति के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ऐसी तकनीकों के माध्यम से संस्कृत साहित्य और ग्रंथों में उपलब्ध विषयगत जानकारी को आधुनिक डिजिटल माध्यमों से खोजने और समझने में सुविधा मिल सकती है।

प्रो. लज्जा भट्ट ने संगणकीय भाषाविज्ञान की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए वाक्यात्मक विश्लेषण (Dependency Parsing) और मशीन अनुवाद (Machine Translation) जैसी आधुनिक तकनीकों की उपयोगिता समझाई। उन्होंने संस्कृत के जटिल व्याकरणिक ढांचे को कंप्यूटर आधारित प्रणालियों में समझने और उसका विश्लेषण करने से जुड़ी संभावनाओं पर चर्चा की।

वहीं प्रो. शालिमा तबस्सुम ने संस्कृत भाषा के ज्ञान ढांचे (Knowledge Frameworks) और पाणिनीय व्याकरण के आधुनिक संगणकीय उपयोग पर अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि पाणिनीय व्याकरण की वैज्ञानिक संरचना को आधुनिक कंप्यूटिंग तकनीक से जोड़कर संस्कृत के अध्ययन-अध्यापन और शोध के नए रास्ते विकसित किए जा सकते हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. हरिओम प्रकाश सिंह ने की। संगोष्ठी का संयोजन एवं संचालन डॉ. विवेक कुमार और डॉ. उमेश चन्द्र जोशी ने किया। इस दौरान संस्कृत को तकनीकी युग के अनुरूप विकसित करने, डिजिटल संसाधन तैयार करने और AI आधारित भाषाई शोध को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।

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