विज्ञान प्रीमियर लीग में 80 छात्र-छात्राओं ने दिखाई प्रतिभा

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बागेश्वर में उत्तराखंड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद देहरादून के तत्वावधान में जनपद के तीनों विकासखंडों में दूसरी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रीमियर लीग के विकासखंड स्तरीय चरण का आयोजन किया गया। बागेश्वर विकासखंड में करीब 80 छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़े प्रश्नों को हल कर अपनी तार्किक क्षमता, ज्ञान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का प्रदर्शन किया।

प्रतियोगिता में जूनियर वर्ग में कक्षा 6 से 8 और सीनियर वर्ग में कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। बागेश्वर विकासखंड की प्रतियोगिता राजकीय इंटर कॉलेज बागेश्वर, कपकोट की राजकीय इंटर कॉलेज कपकोट तथा गरुड़ विकासखंड की प्रतियोगिता राजकीय बालिका इंटर कॉलेज पाये गरुड़ में आयोजित की गई। तीनों विकासखण्डों में कुल 250 बच्चों ने प्रतिभाग किया। प्रतियोगिता को लेकर विद्यार्थियों में खासा उत्साह देखने को मिला। प्रश्नों के उत्तर देने के साथ विद्यार्थियों ने विज्ञान की अवधारणाओं को समझने, उनका तार्किक विश्लेषण करने और दैनिक जीवन में उनके उपयोग को लेकर अपनी समझ का परिचय दिया। जिला समन्वयक दीप चंद्र जोशी ने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आज जीवन के प्रत्येक क्षेत्र से जुड़ी हुई है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से विद्यार्थियों को विज्ञान को रुचिकर तरीके से समझने और अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता में विद्यार्थियों की भागीदारी और उत्साह उत्साहजनक रहा। भविष्य में भी बच्चों को विज्ञान एवं नवाचार से जोड़ने के लिए इस तरह के आयोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

वी.ओ : प्रतियोगिता में प्रतिभागी छात्र अभिज्ञान सिंह जनौटी ने कहा कि विज्ञान से जुड़े सवालों को प्रतियोगिता के रूप में हल करने का अनुभव काफी रोचक रहा। इससे हमें अपनी तैयारी और ज्ञान को परखने का अवसर मिला। कुछ सवाल ऐसे भी थे, जिनके बारे में सोचने से नई चीजें सीखने को मिलीं।

प्रतिभागी छात्र लोकेश सिंह नेगी ने कहा कि कक्षा में विज्ञान पढ़ने और प्रतियोगिता में विज्ञान से जुड़े प्रश्नों को हल करने का अनुभव अलग रहा। यहां हमें अपनी सोच और समझ का इस्तेमाल करना पड़ा। इससे विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ी और आत्मविश्वास भी मजबूत हुआ। साथ ही नया अनुभव भी मिलता है।

इस तरह की प्रतियोगिताओं का उद्देश्य बच्चों में केवल किताबी ज्ञान बढ़ाना नहीं, बल्कि उनमें जिज्ञासा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, समस्या समाधान की क्षमता और नवाचार की सोच विकसित करना है।

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