डाइट में पांच दिवसीय आर्ट एंड क्राफ्ट कार्यशाला शुरू, रचनात्मक शिक्षण पर जोर

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शिक्षकों को स्थानीय संसाधनों से टीएलएम तैयार करने का प्रशिक्षण, कला और खिलौना आधारित शिक्षण से आसान होगी बच्चों की सीख

बागेश्वर। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट), बागेश्वर में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप पांच दिवसीय आर्ट इंटीग्रेटेड आर्ट एंड क्राफ्ट कार्यशाला शुरू हो गई है। 6 से 10 अक्टूबर तक आयोजित कार्यशाला में जिले के विभिन्न विकासखंडों से प्रारंभिक एवं माध्यमिक स्तर के करीब 40 शिक्षक प्रतिभाग कर रहे हैं।

कार्यशाला का विषय “Integrated Learning हेतु Child-Centred Teaching-Learning Material (TLM) निर्माण एवं Art, Craft तथा Toy-Based Pedagogy का प्रयोग” रखा गया है। कार्यशाला में शिक्षकों को कला, शिल्प और खिलौना आधारित शिक्षण-पद्धति के माध्यम से शिक्षण को अधिक प्रभावी, रचनात्मक और बाल-केंद्रित बनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

कार्यशाला का आयोजन प्राचार्य सुश्री कमलेश्वरी मेहता के निर्देशन और कार्य-अनुभव विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. हरिश्चंद्र जोशी के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। मास्टर ट्रेनर के रूप में डीएल वर्मा और डॉ. हरीश दफोटी प्रतिभागी शिक्षकों को विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों का प्रशिक्षण दे रहे हैं।

कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए प्रभारी प्राचार्य डॉ. केएस रावत ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक रोचक और आनंददायी बनाने के साथ शिक्षकों को स्थानीय एवं आसानी से उपलब्ध संसाधनों से उपयोगी तथा आकर्षक टीएलएम तैयार करने में दक्ष बनाना है। कला आधारित गतिविधियों को विषयवस्तु से जोड़कर विद्यार्थियों की सीखने में रुचि और सहभागिता बढ़ाई जा सकती है।

कार्यक्रम समन्वयक डॉ. रुचि पाठक ने बताया कि कार्यशाला के दौरान पपेट निर्माण, पेपर क्राफ्ट, कोलाज, पेपर मैशे और खिलौना आधारित गतिविधियों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। शिक्षकों को इन गतिविधियों को विभिन्न विषयों के साथ जोड़ने के तरीके भी बताए जा रहे हैं, जिससे विद्यालयों में बच्चों के लिए सीखने की प्रक्रिया अधिक सहज और आनंददायी बन सके।

डॉ. दीपिका जोशी ने कहा कि कला एवं क्राफ्ट को केवल सह-पाठ्यक्रम गतिविधि तक सीमित रखने के बजाय इसे विषय आधारित शिक्षण का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। जब बच्चे स्वयं किसी सामग्री को बनाते, छूते और उसके माध्यम से सीखते हैं तो उनकी सहभागिता बढ़ती है और कठिन अवधारणाओं को समझना आसान हो जाता है। उन्होंने कहा कि स्थानीय संसाधनों से तैयार किए गए टीएलएम विद्यालयों में बच्चों के लिए सीखने को अधिक रोचक और व्यावहारिक बनाने में उपयोगी साबित हो सकते हैं।

कार्यशाला में शिक्षक स्वयं विभिन्न गतिविधियों में भाग लेकर टीएलएम तैयार कर रहे हैं। तैयार सामग्री को विद्यालयों में विषय आधारित शिक्षण से जोड़ने के लिए शिक्षकों को प्रेरित किया जा रहा है।

कार्यशाला के सफल संचालन में डाइट के डॉ. केएस रावत, डॉ. सीएम जोशी, डॉ. राजीव जोशी, डॉ. केपी चंदोला, श्रीमती पूजा, डॉ. उर्मिला बिष्ट कन्याल, डॉ. संदीप जोशी, श्री रवि कुमार जोशी और डॉ. दीपा जोशी का महत्वपूर्ण सहयोग एवं मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है। कार्यशाला में डॉ. कविता तिवारी, मनोज कुमार, हेमलता, भरत राणा सहित विभिन्न विकासखंडों से आए शिक्षक प्रतिभाग कर रहे हैं।

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