दादी बनीं दो अनाथ पोतियों की कानूनी संरक्षक, कोर्ट ने भविष्य सुरक्षित करने के लिए लगाईं शर्तें

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बागेश्वर। जिला एवं सत्र न्यायाधीश पंकज तोमर ने एक संवेदनशील और मानवीय मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दो अनाथ बालिकाओं की दादी को उनका विधिक एवं कानूनी संरक्षक नियुक्त किया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि बच्चियों के नाम पर मिलने वाली पेंशन, छात्रवृत्ति, सरकारी सहायता या अन्य संपत्तियों का उपयोग केवल उनके पालन-पोषण, शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य के लिए ही किया जाएगा।

मामला कपकोट तहसील के लिली छुरिया गांव का है। परूली देवी (54) पत्नी दनी राम ने जिला न्यायालय में याचिका दायर कर बताया कि उनके दिवंगत पुत्र जगदीश राम की दो पुत्रियां इंद्रा आर्या (11) और आराध्या आर्या (8) वर्तमान में उनके संरक्षण में रह रही हैं। बच्चियों के पिता का निधन हो चुका है, जबकि उनकी मां ने दूसरा विवाह कर लिया है और वह हल्द्वानी के कठघरिया क्षेत्र में निवास कर रही हैं।

याचिका में बताया गया कि बड़ी बेटी इंद्रा आर्या को विद्यालय से मिलने वाली छात्रवृत्ति की राशि उसकी मां के खाते में जाती है, जिससे बच्चियों की देखभाल कर रही दादी को कोई लाभ नहीं मिल पाता था। ऐसे में बच्चियों की शिक्षा, सुरक्षा और समुचित पालन-पोषण सुनिश्चित करने के लिए विधिक संरक्षक प्रमाणपत्र की मांग की गई।

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सभी तथ्यों, गवाहों के बयानों और बच्चियों के सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखते हुए परूली देवी की याचिका स्वीकार कर ली। बच्चियों की मां बबीता देवी ने भी दोनों नाबालिग बेटियों के दादी के संरक्षण में रहने पर कोई आपत्ति नहीं जताई।

अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि दादी को बच्चियों की किसी भी अचल संपत्ति को बेचने, गिरवी रखने, दान करने या किराये पर देने का अधिकार नहीं होगा। साथ ही सरकारी योजनाओं, छात्रवृत्तियों या अन्य स्रोतों से प्राप्त धनराशि केवल बच्चियों की पढ़ाई और कल्याण पर ही खर्च की जा सकेगी। न्यायालय के इस फैसले से दोनों बालिकाओं के सुरक्षित भविष्य और अधिकारों की रक्षा का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

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