पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण एवं नदियों के पुनर्जीवीकरण को बढ़ावा देने की पहल, चार नौलों की डीपीआर स्वीकृत

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धारी नदी का कैचमेंट क्षेत्र उपचार कार्यों के लिए प्रथम प्राथमिकता में चयनित

जिले में पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण एवं नदियों के पुनर्जीवीकरण के लिए जिला प्रशासन ने पहल तेज कर दी है। गुरुवार को जिलाधिकारी अपूर्वा पाण्डे की अध्यक्षता में स्प्रिंग एंड रिवर रिजुविनेशन अथॉरिटी (SARRA) के अंतर्गत जिला स्तरीय कार्यकारी समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक महत्व के पांच धारा-नौलों के स्रोत संवर्धन एवं उपचार से संबंधित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) की समीक्षा की गई। इनमें से चार डीपीआर को स्वीकृति प्रदान की गई, जबकि एक डीपीआर में आवश्यक संशोधन कर पुनः प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में जिले की तीन नदियों के पुनर्जीवीकरण एवं उपचार के लिए प्रस्तुत प्रस्तावों पर भी विचार-विमर्श किया गया। इसके बाद धारी नदी के कैचमेंट क्षेत्र को उपचार कार्यों के लिए प्रथम प्राथमिकता पर सर्वसम्मति से चयनित किया गया।

जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को जल स्रोतों एवं नदियों के संरक्षण, पुनर्जीवीकरण और सतत प्रबंधन के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने पारंपरिक जल स्रोतों के संवर्धन तथा जल की उपलब्धता को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी नरेश कुमार सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

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