1962, 1965 और 1971 के युद्धों के योद्धा रहे कृपाल सिंह रावत, अंतिम समय तक समाज सेवा में रहे सक्रिय

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बागेश्वर जनपद की वीरभूमि कमस्यार घाटी के लिए एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। क्षेत्र के गौरव, वरिष्ठ पूर्व सैनिक और समाजसेवी कैप्टन (सूबेदार) कृपाल सिंह रावत का बीते दिनों साईं हॉस्पिटल में निधन हो गया। वे लगभग 91 वर्ष के थे। उनके निधन से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। उनके जाने को कमस्यार घाटी के एक गौरवशाली युग का अंत माना जा रहा है।

सन् 1935 में जन्मे कृपाल सिंह रावत ने वर्ष 1954 में भारतीय सेना की कुमाऊँ रेजिमेंट में भर्ती होकर देश सेवा का मार्ग चुना था। उन्होंने 1962 के भारत-चीन युद्ध में ओलांग क्षेत्र, 1965 के भारत-पाक युद्ध में पंजाब के तरण तारण क्षेत्र और 1971 के युद्ध में सामा-सलकोट क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। तीनों युद्धों के दौरान उन्होंने वायरलेस संचार व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाली और अपने साहस, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा से मातृभूमि की रक्षा में अहम योगदान दिया।

सेना से वर्ष 1982 में सेवानिवृत्त होने के बाद भी उन्होंने आराम का जीवन नहीं चुना। उन्होंने खुद को पूरी तरह समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया। वे लंबे समय तक बागेश्वर जिले के पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष रहे और पूर्व सैनिकों तथा आम लोगों की समस्याओं को मजबूती से उठाते रहे। कमस्यार घाटी में जनहित से जुड़े आंदोलनों और सामाजिक कार्यों में उनकी हमेशा सक्रिय भूमिका रही।

बताया जा रहा है कि अपने जीवन के अंतिम समय तक भी वे सामाजिक सरोकारों से जुड़े रहे। हाल ही में वे कांडा ब्लॉक संघर्ष समिति के साथ कांडा कालिका माता मंदिर में आयोजित अनशन में भी शामिल हुए थे। उनका जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा। उन्होंने हमेशा युवाओं को देशभक्ति, अनुशासन और समाज सेवा का संदेश दिया। मार्च माह में उनकी धर्मपत्नी का भी निधन हो गया था। कुछ ही समय के भीतर उनका इस तरह दुनिया छोड़ जाना उनके गहरे पारिवारिक और भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाता है।

कर्नल बी.एस. रौतेला ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि अब देश के स्वतंत्रता बाद के सभी युद्धों में भाग लेने वाले बहुत कम वार वेटरन्स बचे हैं। उन्होंने कहा कि कैप्टन कृपाल सिंह रावत जैसे योद्धाओं ने राष्ट्र धर्म को सर्वोपरि मानते हुए अपना पूरा जीवन मातृभूमि की सेवा में समर्पित कर दिया। जानकारी के अनुसार शुक्रवार प्रातः उनका पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। समस्त क्षेत्र ने उनके योगदान को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।

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