सीधी भर्ती के विरोध में गरजे शिक्षक, कार्य बहिष्कार कर धरने पर बैठे

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बागेश्वर। राजकीय शिक्षक संघ उत्तराखंड ने प्रधानाचार्य की सीधी भर्ती के खिलाफ ज़ोरदार विरोध दर्ज किया। जिले के तीनों विकासखंडों के सैकड़ों शिक्षक सामूहिक आकस्मिक अवकाश लेकर मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय परिसर पहुंचे और जमकर नारेबाज़ी की। शिक्षकों ने कहा कि सरकार शिक्षकों की समस्याओं की लगातार अनदेखी कर रही है और अब पदोन्नति की जगह सीधी भर्ती थोपकर उनके अधिकार छीनने का काम कर रही है।

धरने पर बैठे शिक्षकों ने स्पष्ट कहा कि उनकी मांगें लंबे समय से अनसुनी की जा रही हैं। उन्होंने मांग की कि एलटी से प्रवक्ता, प्रवक्ता व एलटी से प्रधानाध्यापक तथा प्रधानाध्यापक से प्रधानाचार्य तक सभी पदों पर शीघ्र पदोन्नति हो।
विभागीय सीधी भर्ती प्रक्रिया को तत्काल निरस्त किया जाए। वार्षिक स्थानांतरण प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाए। शिक्षकों की 34 लंबित मांगों पर, जिन पर विभाग पहले ही सहमति दे चुका है, अब तुरंत क्रियान्वयन हो।

वहीं जिला अध्यक्ष गोपाल दत्त पंत ने कहा कि आज हमने जिला स्तरीय कार्य बहिष्कार किया है। इसमें जिले भर के शिक्षक शामिल हैं। हमारी मांगें यदि नहीं मानी गईं तो हम बड़े और उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

महामंत्री देवेंद्र मेहता ने कहा कि हम लगातार सीधी भर्ती का विरोध कर रहे हैं। हमारे साथी वर्षों से पदोन्नति की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी सुनवाई नहीं कर रही। यह सीधी भर्ती पूरी तरह अन्यायपूर्ण है और इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

एससी/एसटी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष संजय कुमार टम्टा ने कहा कि हमने भी राजकीय शिक्षक संघ को अपना पूर्ण समर्थन दिया है। हमारा हक हमसे छीना जा रहा है। सीधी भर्ती किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है। सभी शिक्षक इसका विरोध कर रहे हैं और आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज़ किया जाएगा।

वहीं धरने में शामिल शिक्षकों ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें समय पर पूरी नहीं हुईं तो वे चरणबद्ध आंदोलन को तेज़ करेंगे। साथ ही विधानसभा सत्र तक राज्यव्यापी विरोध की रूपरेखा भी बनाई जाएगी। इस दौरान नूर अफजल,हरीश चंद्र भट्ट,उमा लोहनी,राजेंद्र सिंह रावत,किरन जोशी,अंजू कालाकोटी, प्रकाश ऐठानी, डॉ हरीश सिंह दफौटी आदि मौजूद रहे।

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