बागेश्वर। विधायक और एक स्थानीय महिला को लेकर सोशल मीडिया पर कथित अभद्र टिप्पणी के मामले में युवक के जेल जाने के बाद अब इस प्रकरण में महिला का पक्ष भी सामने आया है। महिला ने सोशल मीडिया के जरिए देश के प्रधानमंत्री, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री, पुलिस महानिदेशक, राज्य महिला आयोग, राष्ट्रीय महिला आयोग सहित संबंधित अधिकारियों से न्याय की अपील की है।
महिला का कहना है कि वह पिछले करीब दो वर्षों से मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक पीड़ा झेल रही हैं। उनके अनुसार, सोशल मीडिया पर एक कथित अश्लील फोटो को उनके नाम से जोड़कर उन्हें बदनाम किया गया, जबकि वह फोटो उनकी नहीं है और उसमें दिखाई देने वाली युवती भी वह नहीं हैं।
महिला ने आरोप लगाया कि बिना किसी ठोस प्रमाण और वैज्ञानिक जांच के उनका नाम उस फोटो से जोड़ दिया गया। इससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को गहरी ठेस पहुंची है और उन्हें लगातार मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा है। उनका कहना है कि इस पूरे मामले में कई तरह की बातें सोशल मीडिया पर फैलाई गईं, जिससे उनकी छवि प्रभावित हुई।
महिला ने अपनी पोस्ट में स्पष्ट किया है कि वह किसी व्यक्ति के खिलाफ बिना आधार कार्रवाई की मांग नहीं कर रही हैं। उनकी केवल यही मांग है कि कथित फोटो की निष्पक्ष और वैज्ञानिक फॉरेंसिक जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों से अनुरोध किया है कि यदि जांच में यह साबित होता है कि फोटो उनकी नहीं है, तो उनकी प्रतिष्ठा को हुए नुकसान के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाए। साथ ही, यदि किसी ने बिना प्रमाण उनका नाम फोटो से जोड़कर उन्हें बदनाम किया है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जाए।
फिलहाल महिला द्वारा सोशल मीडिया पर अपना पक्ष सार्वजनिक किया गया है। मामले में जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि हो सकेगी।
