बेरोजगारी, खनन बंदी और क्रेशर नीति पर ऐठानी ने सरकार को घेरा

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बागेश्वर। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष हरीश ऐठानी ने प्रदेश सरकार पर आपदा प्रबंधन और स्थानीय समस्याओं को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार और उसके प्रतिनिधि आपदा से प्रभावित क्षेत्रों को नजरअंदाज कर रहे हैं, जिससे लोगों की जान-माल की सुरक्षा पर संकट मंडरा रहा है।

ऐठानी ने कहा कि वर्षों पूर्व आई आपदा से प्रभावित क्षेत्रों में आज तक कोई ठोस कार्य नहीं किया गया। खड़िया खदानों में बने विशाल गड्ढे आज भी वैसे ही पड़े हैं, जो बड़ी आपदा को खुला निमंत्रण दे रहे हैं। स्थानीय ग्रामीण इन खतरों से भयभीत और असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, लेकिन सरकार इस ओर बिल्कुल भी संवेदनशील नहीं दिख रही है। उन्होंने कहा कि जनपद बागेश्वर में खड़िया ही एकमात्र रोजगार का मुख्य साधन था, लेकिन इसके बंद हो जाने से क्षेत्र के सैकड़ों लोग बेरोजगार हो गए हैं। खेत मालिक, ट्रक और डंपर चालक, जेसीबी मशीन मालिक सभी आजीविका के अभाव में भूखमरी की कगार पर पहुंच चुके हैं। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष ने यह भी कहा कि जनपद के एक विधायक स्वयं कभी माइन्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे हैं, मगर आज इस गंभीर संकट पर उनकी चुप्पी सरकार की असंवेदनशीलता को दर्शाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनपद के भीतर संचालित स्टोन क्रेशरों को बंद करवा दिया गया है, जबकि सीमावर्ती क्षेत्रों में झोपड़ी जैसे ढांचों में अवैध क्रेशर खुलेआम संचालित हो रहे हैं, जिससे शासन-प्रशासन की दोहरी नीति उजागर होती है। हरीश ऐठानी ने बताया कि बीते चार महीनों से करीब 70 डंपरों को पुलिस द्वारा सीज कर दिया गया है, जिससे न केवल ड्राइवर और मालिक बेरोजगार हुए हैं, बल्कि उन्हें भारी आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और उसके नुमाइंदे आपदा को अवसर में बदलने की कोशिश कर रहे हैं। ऐठानी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि शीघ्र ही आपदा प्रभावित क्षेत्रों में ठोस कार्रवाई नहीं होती और रोजगार के साधनों को पुनः चालू नहीं किया गया, तो वह जन आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उन्होंने चेताया कि जनता का सब्र टूट चुका है और अब संघर्ष का रास्ता ही शेष है।

अहमदाबाद घटना पर गृह मंत्री के बयान की करी निंदा

पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष ने अहमदाबाद विमान दुर्घटना पर केंद्रीय गृह मंत्री के बयान को भी शर्मनाक और गैर-जिम्मेदाराना बताया। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी त्रासदी के बाद बयानबाजी करना पीड़ितों की पीड़ा के साथ खिलवाड़ है।

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