हल्द्वानी के जगदम्बा नगर स्थित जिला पूर्व सैनिक लीग कार्यालय, सैनिक मिलन केंद्र में बुधवार को ऑपरेशन रक्षक के वीर बलिदानी हवलदार तिलक चंद्र की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। इस दौरान पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं और गौरव सेनानियों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित किए और दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
हवलदार तिलक चंद्र का जन्म 16 जून 1966 को पिथौरागढ़ जिले के कनालीछीना विकासखंड के ग्राम बचकोट, पीपली में हुआ था। बचपन से ही उनका सपना भारतीय सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करना था। उन्होंने वर्ष 1985 में जीआईसी पीपली से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की और उसी वर्ष कुमाऊँ रेजिमेंट सेंटर में भर्ती हो गए। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उनकी नियुक्ति 17 कुमाऊँ रेजिमेंट में हुई। अपनी मेहनत, अनुशासन और उत्कृष्ट कार्यशैली के कारण उन्होंने सेना में कई जिम्मेदारियां सफलतापूर्वक निभाईं।
13 मार्च 1994 को उनका विवाह सुशीला देवी से हुआ। उनके परिवार में एक पुत्र अनिल और एक पुत्री मनीषा हैं।
बाद में उनकी तैनाती 50 राष्ट्रीय राइफल्स में हुई, जहां वे जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों में सक्रिय रहे। 5 अगस्त 2003 को आतंकवादियों के साथ हुई एक मुठभेड़ में उन्होंने अद्भुत साहस का परिचय देते हुए मातृभूमि की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया और वीरगति को प्राप्त हुए।
कार्यक्रम में जिला पूर्व सैनिक लीग के अध्यक्ष लेफ्टिनेंट कर्नल बी.एस. रौतेला ने उनके जीवन और सैन्य योगदान पर प्रकाश डाला। वहीं, उस मुठभेड़ में उनके साथ मौजूद रहे नायब सूबेदार देवेंद्र दफौटी ने घटना को याद करते हुए भावुक संस्मरण साझा किए। 50 राष्ट्रीय राइफल्स के जवानों ने भी श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके परिजनों को स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया।
सभा में कई पूर्व सैनिक, वीरांगनाएं और गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन भारत माता की जय और भारतीय सेना अमर रहे के नारों के साथ हुआ।
