शहीद जवान के पिता को मिलेगा ₹30 लाख बीमा क्लेम, उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को लगाई फटकार

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बागेश्वर: जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, बागेश्वर ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बीमा कंपनियों के तकनीकी आधार पर दावों को खारिज करने की प्रवृत्ति पर कड़ा रुख अपनाते हुए सेना की कठिन ट्रेनिंग के दौरान जान गंवाने वाले जवान के परिजनों के पक्ष में फैसला सुनाया है। आयोग ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को निर्देश दिया है कि वह मृतक जवान के पिता को ₹30 लाख की व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा राशि का भुगतान तत्काल सुनिश्चित करे।
मामला दुग नाकुरी तहसील के उडियार गांव निवासी नवीन सिंह खाती से जुड़ा है, जो भारतीय सेना की महार रेजिमेंट में मध्य प्रदेश के सागर में तैनात थे। जानकारी के अनुसार, 22 जुलाई 2019 को सैन्य प्रशिक्षण के दौरान दौड़ते समय नवीन सिंह खाती अचानक अचेत होकर गिर पड़े। उन्हें तत्काल सैन्य अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण हार्ट अटैक बताया गया था।
बताया गया कि नवीन सिंह खाती का भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में डिफेंस सैलरी पैकेज खाता था, जिसके अंतर्गत उन्हें यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी की ओर से ₹30 लाख का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा कवर मिला हुआ था। जवान की मौत के बाद जब परिजनों ने बीमा दावा प्रस्तुत किया, तो कंपनी ने इसे ‘प्राकृतिक मृत्यु’ बताते हुए क्लेम देने से इनकार कर दिया।
इसके बाद पीड़ित परिवार ने न्याय के लिए जिला उपभोक्ता आयोग की शरण ली। आयोग के अध्यक्ष रमेश कुमार जायसवाल, सदस्य रमेश चंद्र सनवाल और सदस्या हंसी रौतेला की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए बीमा कंपनी के तर्कों को खारिज कर दिया।
आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि सैन्य प्रशिक्षण जैसी कठिन और तनावपूर्ण शारीरिक परिस्थितियों में हुई मौत को सामान्य प्राकृतिक मृत्यु नहीं माना जा सकता। ऐसी परिस्थिति में हुई मृत्यु एक असामान्य और अप्रत्याशित घटना है, जिसे कानून की दृष्टि में दुर्घटना की श्रेणी में रखा जाएगा।
आयोग ने बीमा कंपनी को बीमा राशि का भुगतान तत्काल करने के आदेश दिए हैं। साथ ही एसबीआई की लालकुर्ती शाखा को भी निर्देशित किया गया है कि पीड़ित परिवार को क्लेम प्रक्रिया में हरसंभव प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराया जाए।
यह फैसला न केवल सैनिक परिवारों के लिए राहतभरा माना जा रहा है, बल्कि बीमा दावों को तकनीकी आधार पर खारिज करने वाली कंपनियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

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