ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर जिलाधिकारी सख्त, 15 दिन में भूमि चिन्हित करने के निर्देश

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जिलाधिकारी अपूर्वा पाण्डे की अध्यक्षता में बुधवार को कलक्ट्रेट सभागार में जिला गंगा समिति (नमामि गंगे) की मासिक बैठक आयोजित की गई। बैठक में ठोस एवं प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन, ग्रामीण स्वच्छता, डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण तथा विभिन्न स्वच्छता गतिविधियों की प्रगति की समीक्षा की गई।

बैठक में जिलाधिकारी ने बागेश्वर एवं गरुड़ नगर निकायों को ठोस अपशिष्ट निस्तारण प्लांट की स्थापना हेतु 15 दिनों के भीतर उपयुक्त भूमि चिन्हित कर प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यदि एक स्थान पर पर्याप्त भूमि उपलब्ध नहीं हो रही है तो आवश्यकता अनुसार विकेंद्रित स्थानों का चिन्हीकरण कर भी प्रस्ताव तैयार किया जाए।

उन्होंने डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण से होने वाले राजस्व में वृद्धि के लिए प्रभावी प्रयास करने तथा प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के अंतर्गत चालानी कार्रवाई में तेजी लाने के निर्देश दिए। साथ ही जल निगम को बागेश्वर नगर के फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (एफएसटीपी) की डीपीआर जिला प्रशासन के साथ साझा करने को कहा।

जिलाधिकारी ने जिला पंचायत एवं नगर निकायों को विकासखंडों में सड़क किनारे स्थापित डस्टबिनों को नियमित रूप से खाली कराने तथा इसकी अनुपालन रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिला गंगा समिति की अगली बैठक में सभी खंड विकास अधिकारी एवं जिला पंचायत ग्रामीण स्वच्छता, डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण तथा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के अंतर्गत किए गए कार्यों की विस्तृत प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।

बैठक में जिला परियोजना अधिकारी, नमामि गंगे, विवेक परिहार ने अवगत कराया कि जून माह में नगर निकायों द्वारा डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण से लगभग ₹1.82 लाख का राजस्व अर्जित किया गया। इसके अतिरिक्त प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन के अंतर्गत 55 चालानी कार्रवाई भी की गई।

बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी आदित्य रत्ना, मुख्य विकास अधिकारी नरेश कुमार तथा संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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