बागेश्वर। आगंतुक वनाधिकारी बागेश्वर प्रकाश चंद्र आर्य ने मंडलसेरा स्थित देवकी लघु वाटिका का भ्रमण कर वहां विभिन्न प्रजातियों के पौधों और पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यो का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने जनपद में हरियाली बढ़ाने के प्रयासों की सराहना करते हुए वाटिका संचालकों को धन्यवाद दिया।
वनाधिकारी ने वाटिका में संरक्षित एवं रोपित बहुउपयोगी प्रजातियों सिलिंग, च्यूरा, जामुन, तिमूर, चंदन, अर्जुन, रुद्राक्ष, कचनार, रिंगाल और बांज सहित अन्य पौधों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल फलदार, चारा-पत्ती और बांस प्रजातियों का अधिक से अधिक रोपण पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहायक हो सकता है। सड़क चौड़ीकरण जैसे विकास कार्यो के साथ भी हरित क्षेत्र बढ़ाने की जरूरत है।
आर्य ने वाटिका के कार्यो में व्यक्तिगत और विभागीय स्तर पर सहयोग देने पर सहमति जताई। उन्होंने कहा कि पौधरोपण और उनका संरक्षण बाढ़, मिट्टी कटाव तथा भूस्खलन जैसी आपदाओं के प्रभाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। साथ ही स्थानीय स्तर पर इन प्रजातियों के संरक्षण से लोगों को रोजगार और आय के नए अवसर भी मिल सकते हैं।
इस दौरान मुगा रेशम की खेती के साथ ऐसी फसलों के उत्पादन पर भी चर्चा हुई, जिन्हें जंगली सूअर, बंदर आदि वन्यजीवों से अपेक्षाकृत कम नुकसान हो। वनाधिकारी ने इसे बड़े स्तर पर अपनाए जाने की संभावनाओं को किसानों की अतिरिक्त आमदनी से जोड़ते हुए प्रोत्साहित किया।
रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर उन्होंने वाटिका में दशकों से रोपे गए पौधों और वृक्षों पर रक्षासूत्र बांधने की परंपरा को भी सराहा। उन्होंने कहा कि वृक्ष प्रकृति और जीव-जगत की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसलिए इनका संरक्षण सभी की जिम्मेदारी है।
इस अवसर पर देवकी देवी ने वनाधिकारी का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया। किशन सिंह मलड़ा ने वाटिका भ्रमण के लिए उनका आभार जताते हुए उन्हें पैशन फ्रूट और सीता अशोक के पौधे भेंट किए। भ्रमण के दौरान प्रशांत सिंह मलड़ा, भजन सिंह, शंकर राम, सचिन, दीपक आर्य, दया किशन भट्ट, मोहन सिंह हरड़िया, लक्ष्मी सहित कई नगरवासी मौजूद रहे।
