बागेश्वर। पहाड़ के हजारों शिक्षकों के भविष्य पर मंडरा रहे अनिवार्य सेवानिवृत्ति के संकट के विरोध में सोमवार को राजकीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ जिला-बागेश्वर के बैनर तले जनपद के सैकड़ों शिक्षक एवं शिक्षिकाएं ऐतिहासिक नुमाइशखेत मैदान में एकत्र हुए। शिक्षकों ने टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ सरकार के प्रति नाराजगी जताते हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और बाद में कलेक्ट्रेट तक विशाल रैली निकालकर जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया।
प्रदर्शन के दौरान शिक्षक नेताओं ने कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद उत्तराखंड के लगभग 15 हजार से 30 हजार सेवारत शिक्षकों के सामने नौकरी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। शिक्षकों का कहना है कि आदेश के अनुसार 55 वर्ष तक की आयु के प्रारंभिक शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है तथा इसके लिए केवल दो वर्ष का समय निर्धारित किया गया है। ऐसा न करने पर शिक्षकों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति का सामना करना पड़ सकता है।
शिक्षकों ने इसे अव्यावहारिक बताते हुए कहा कि प्रभावित अधिकांश शिक्षक 40 से 55 वर्ष की आयु वर्ग में आते हैं, जिन पर पारिवारिक और सामाजिक जिम्मेदारियों का भारी दबाव है। इस उम्र में बच्चों की पढ़ाई, विवाह और अन्य जिम्मेदारियों के बीच दोबारा परीक्षा देने की बाध्यता मानसिक और व्यवहारिक रूप से बेहद कठिन है।
शिक्षा विभाग पर लापरवाही का आरोप
ज्ञापन में शिक्षा विभाग और राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए। शिक्षक नेताओं ने आरोप लगाया कि वर्ष 2017 में केंद्र सरकार द्वारा कानून में संशोधन कर शिक्षकों को चार वर्ष की छूट दिए जाने के बावजूद शिक्षा विभाग ने समय रहते कोई ठोस दिशा-निर्देश जारी नहीं किए। पिछले आठ वर्षों की विभागीय निष्क्रियता का खामियाजा अब उम्रदराज शिक्षकों को भुगतना पड़ रहा है।
2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को छूट देने की मांग
संघ की प्रमुख मांग है कि 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त सभी अनुभवी शिक्षकों, जिनके पास बीटीसी, सीपीएड और बीएड जैसी आवश्यक शैक्षिक योग्यताएं हैं, उन्हें टीईटी की अनिवार्यता से पूरी तरह मुक्त रखा जाए। शिक्षकों का कहना है कि उनकी नियुक्ति के समय यह नियम लागू नहीं था, इसलिए बाद में इसे लागू करना न्यायसंगत नहीं है।
प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने कहा कि उन्होंने जीवन का बड़ा हिस्सा सरकारी स्कूलों को संवारने और बच्चों का भविष्य गढ़ने में लगाया है, लेकिन अब सेवा के अंतिम पड़ाव में नौकरी जाने का भय उन्हें मानसिक तनाव और अवसाद की ओर धकेल रहा है।
नुमाइशखेत मैदान से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन और कलेक्ट्रेट घेराव का नेतृत्व जिला अध्यक्ष रमेश सिंह रावत, जिला महासचिव भुवन चंद्र भट्ट, कोषाध्यक्ष आनंद मोहन जोशी, संरक्षक जगदीश चंद्र गुरुरानी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्रीमती दमवंती देव, संयुक्त मंत्री राम चंद्र जोशी और मीडिया प्रभारी संतोष सिंह दफौटी ने किया।
शिक्षकों ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र और राज्य सरकार ने समय रहते सहानुभूतिपूर्वक निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन पूरे उत्तराखंड में और व्यापक तथा उग्र रूप ले सकता है।
