53 दिन से आंदोलन के बावजूद नहीं जागा शासन-प्रशासन,
बागेश्वर। सड़क सुविधा से वंचित थालीधार क्षेत्र की तस्वीर एक बार फिर सामने आई है। सरण (थालीधार) गांव निवासी निशा पत्नी बीरेंद्र सिंह की बागेश्वर में डिलीवरी के बाद जब उन्हें घर लाया गया तो सड़क से करीब दो किलोमीटर की दूरी ग्रामीणों को पैदल तय करनी पड़ी। डिलीवरी के बाद महिला को इस तरह पैदल घर तक ले जाने की स्थिति ने ग्रामीण क्षेत्र में सड़क सुविधा की बदहाल तस्वीर सामने ला दी।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव तक सड़क नहीं होने के कारण मरीजों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है। आपात स्थिति में लोगों को सड़क तक पहुंचाने के लिए भी ग्रामीणों को कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। सड़क निर्माण की मांग को लेकर थालीधार के ग्रामीण पिछले 53 दिनों से आंदोलनरत हैं। इसके बावजूद शासन-प्रशासन की ओर से सड़क निर्माण की दिशा में ठोस पहल नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। आंदोलन के तहत शनिवार को राजेंद्र सिंह दानू (43) और रमेश सिंह दानू (38) धरने पर बैठे।
आंदोलनकारियों ने कहा कि सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि ग्रामीणों के लिए स्वास्थ्य और आपातकालीन जरूरत से जुड़ी मूलभूत सुविधा है। डिलीवरी के बाद महिला को दो किलोमीटर पैदल घर लाने की घटना ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आंदोलनकारियों ने दो टूक कहा कि सड़क निर्माण की मांग पूरी होने तक आंदोलन किसी भी सूरत में वापस नहीं लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि लंबे समय से आंदोलन के बावजूद शासन-प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है, जो क्षेत्र के ग्रामीणों के साथ बेहद दुखद स्थिति है।
