बागेश्वर जिले में करवाचौथ का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। सुहागिन महिलाओं ने पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य की कामना के साथ निर्जला व्रत रखा। महिलाओं ने सोलह श्रृंगार कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। नगर के प्रसिद्ध बागनाथ मंदिर में विभिन्न वार्डों से पहुंचीं महिलाओं ने सामूहिक पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
मंदिर परिसर में महिलाओं ने अलग-अलग टोलियां बनाकर भगवान शिव और उनके परिवार की पूजा की। इस दौरान सिम्मी सोनी ने करवाचौथ की कथा सुनाई। महिलाओं ने करवा माता की आरती कर पारंपरिक रीति-रिवाजों का निर्वहन किया। मंदिर परिसर में पूरे समय भक्तिमय माहौल बना रहा।
बुजुर्ग महिला सिम्मी सोनी ने कहा कि करवाचौथ भारतीय परंपरा और आस्था से जुड़ा पर्व है। इस दिन महिलाएं व्रत रखकर परिवार की खुशहाली और वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। सामूहिक पूजा और कथा श्रवण से धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है।
डॉ रीमा उपाध्याय ने कहा कि करवाचौथ का पर्व भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करती हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे पर्व हमारी परंपराओं को जीवंत रखने के साथ ही महिलाओं को एक साथ मिलकर त्योहार मनाने और आपसी मेलजोल बढ़ाने का अवसर भी प्रदान करते हैं।
नेहा रावल ने कहा कि करवाचौथ महिलाओं के लिए आस्था, प्रेम और विश्वास का पर्व है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ निर्जला व्रत रखती हैं। उन्होंने कहा कि करवाचौथ हमारी पारंपरिक संस्कृति और रीति-रिवाजों से जुड़ा त्योहार है, जिसे महिलाएं पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाती हैं।
करवाचौथ के अवसर पर महिलाओं ने दिनभर निर्जला व्रत रखा। बाबा बागनाथ मंदिर में महिलाओं ने सामूहिक पूजा अर्चना कर बाबा से आशीर्वाद मांगा।


