बागेश्वर में रक्षाबंधन के पर्व को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी, बागेश्वर के तत्वावधान में स्वर्गाश्रम क्षेत्र में वृहद पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ जिलाधिकारी अपूर्वा पांडे ने किया। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपे गए और उन्हें रक्षा सूत्र बांधकर उनके संरक्षण एवं संवर्धन का संकल्प लिया गया।कार्यक्रम के दौरान आयोजित राखी प्रतियोगिता के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। प्रतियोगिता के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और रक्षाबंधन के संदेश को रचनात्मक रूप से लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
पौधारोपण अभियान के दौरान देवदार, बुरांश, काफल, अतीस, टून, खुरमानी, वैगनबेनिया और मेहल समेत विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए। कार्यक्रम में स्थानीय महिलाओं ने पारंपरिक तरीके से तैयार की गई राखियां पेड़ों को बांधीं। राखी बांधकर पेड़ों की रक्षा का संकल्प लेना कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहा। इसके माध्यम से प्रकृति और मानव के बीच भावनात्मक जुड़ाव का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की। लोगों ने पौधे लगाने के साथ ही उनकी नियमित देखभाल, सुरक्षा और संवर्धन की जिम्मेदारी लेने पर जोर दिया। रेडक्रॉस ने स्पष्ट किया कि पौधारोपण को केवल एक औपचारिकता या रस्म तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि लगाए गए पौधों की देखरेख और उनके संरक्षण को प्राथमिकता दी जाएगी। जिलाधिकारी अपूर्वा पांडे ने कहा कि यह पहल केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पौधों को बचाने के लिए जनसहभागिता का अनुकरणीय प्रयास है। रक्षाबंधन के पर्व पर पेड़ों को रक्षा सूत्र बांधना समाज को पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी का अहसास कराने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि प्रकृति की रक्षा सामूहिक जिम्मेदारी है और ऐसे अभियानों में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी जरूरी है।
रेडक्रॉस सोसायटी के चेयरमैन इंद्र सिंह फर्स्वाण ने कहा कि इस तरह के आयोजन समाज में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब लोग पेड़ों के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ते हैं तो उनके संरक्षण की भावना भी मजबूत होती है। वहीं रेडक्रॉस के सचिव आलोक पांडे ने कहा कि पेड़ लगाना जितना जरूरी है, उससे कहीं अधिक जरूरी उनकी सुरक्षा और देखभाल करना है। उन्होंने कहा कि लगाए गए पौधों को संरक्षित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे, ताकि आज लगाए गए पौधे भविष्य में क्षेत्र की हरियाली और पर्यावरण का आधार बन सकें।
रक्षाबंधन के इस आयोजन ने पर्व की पारंपरिक भावना को प्रकृति संरक्षण से जोड़ते हुए यह संदेश दिया कि जिस तरह भाई-बहन एक-दूसरे की रक्षा का संकल्प लेते हैं, उसी तरह समाज को भी पेड़-पौधों और पर्यावरण की रक्षा का संकल्प लेना चाहिए।
